Earthlings

Earthlings की नैतिकता

जन असहमतियाँ कैसे सुलझाता है और किस तरह के संवाद पर टिका रहता है

यह दस्तावेज़ व्युत्पन्न है। Earthlings चार्टर से मतभेद होने पर चार्टर लागू होता है, और चार्टर का घोषणा से मतभेद होने पर घोषणा। चार्टर घोषणा के अंगीकरण के साथ प्रवर्तन में आता है (चार्टर, अनुच्छेद 38); उससे पहले न DAO सभा है, न स्वतंत्र परिषद, और नीचे उनके बारे में जो कहा गया है, वह अंगीकरण के बाद की रीति का वर्णन करता है।

यह दस्तावेज़ किन्हीं भी उपायों के लिए कोई आधार नियत नहीं करता। ऐसे आधारों की बंद सूची चार्टर के अनुच्छेद 22 और 22क में है और उसका विस्तार नहीं किया जाएगा - न इस दस्तावेज़ से, न किसी निर्णय से, न जमी हुई प्रथा से।

नीचे लिखा हुआ दो हिस्सों में बँटता है, और उनके बीच का अंतर महत्वपूर्ण है। विवाद सुलझाने के नियम उस प्रक्रिया का वर्णन करते हैं जिस पर जन (a people) टिका रहता है। बाकी सब - सिवाय उन नियमों के, जो यह दस्तावेज़ स्वयं जन, उसके निकायों और प्लेटफ़ॉर्म पर डालता है - वह है जिसकी ओर जन बढ़ना चाहता है और जिसे सीखने में मदद करता है; व्यक्ति के लिए इसके अनुरूप न होने के परिणाम कभी नहीं आते।

खंड 01. असहमतियों का समाधान

लोगों के बीच असहमतियाँ अपरिहार्य हैं और अनुभव, मूल्यों तथा हितों के अंतर से पैदा होती हैं। टकराव अपने आप में समस्या नहीं है - समस्या तब बनती है जब उसे सुलझाना न आए।

Earthlings जन दंडात्मक के बजाय पुनर्स्थापक रास्ता चुनता है: असहमति पर विचार का लक्ष्य संबंध फिर से जोड़ना और परिणाम सुधारना है, सज़ा देना नहीं।

चरण 1. सीधी बातचीत

पहला कदम - पक्षों के बीच सीधी बात। अधिकांश असहमतियाँ यहीं सुलझ जाती हैं।

क्या मदद करता है: दूसरे पक्ष को बीच में टोके बिना सुनना; अपनी बात आरोपों से नहीं, तथ्यों और अपनी भावनाओं से रखना; विपरीत स्थितियों के पीछे साझा हित खोजना; ऐसे हल सुझाना जिनमें दोनों पक्षों का ध्यान हो।

चरण 2. मध्यस्थता

अगर सीधी बातचीत से समाधान न निकले, तो पक्ष मध्यस्थता का सहारा ले सकते हैं।

मध्यस्थता एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है, जिसमें एक तटस्थ बिचौलिया पक्षों को परस्पर स्वीकार्य हल तक पहुँचने में मदद करता है। मध्यस्थ न निर्णय सुनाता है, न यह तय करता है कि सही कौन है। उसका काम बातचीत के लिए हालात बनाना है।

मध्यस्थ कौन हो सकता है। कोई भी earthling, जिस पर दोनों पक्षों का भरोसा हो और जिसका विवाद के नतीजे में कोई निजी हित न हो; उस पर पक्ष स्वयं सहमत होते हैं।

क्रम:

  1. एक पक्ष दूसरे को मध्यस्थता का प्रस्ताव देता है;
  2. दूसरा पक्ष अपनी सहमति देता है - दोनों पक्षों की सहमति के बिना मध्यस्थता नहीं होती;
  3. पक्ष मिलकर मध्यस्थ चुनते हैं;
  4. मध्यस्थ मुलाक़ात कराता है और प्रक्रिया चलाता है;
  5. जो सहमति बनी, वह लिखित रूप में दर्ज की जाती है।

सहमति का बल नैतिक होता है: पक्ष उसे निभाने का स्वैच्छिक दायित्व अपने ऊपर लेते हैं। ज़बरदस्ती निभवाने का कोई तरीक़ा जन के पास न है और न सोचा गया है।

गोपनीयता। मध्यस्थता में जो कहा गया, उसे न मध्यस्थ बताता है, न पक्ष। वह हुई और उसका नतीजा क्या रहा - सहमति बनी या नहीं बनी - यह केवल दोनों पक्षों की सहमति से प्रकाशित होता है; प्रश्न को सभा में ले जाने के लिए पक्ष इतना बता सकता है कि मध्यस्थता हुई थी और उसने विवाद नहीं सुलझाया, और इससे अधिक कुछ नहीं।

अवधि। दूसरे पक्ष की सहमति के क्षण से तीस दिन; आपसी सहमति से अवधि बढ़ाई जा सकती है।

मध्यस्थता से इनकार का कोई परिणाम नहीं होता। भाग न लेने की इच्छा उल्लंघन नहीं है, उसका मूल्यांकन नहीं होता और आगे किसी भी विचार में उसे ध्यान में नहीं लिया जाता (घोषणा, अनुच्छेद 4)।

चरण 3. DAO सभा में ले जाना

अगर मध्यस्थता से समाधान न निकले, और विवाद समुदाय के हितों को छूता हो या सैद्धांतिक निर्णय माँगता हो, तो कोई भी पक्ष प्रश्न को सभा के विचार में ले जा सकता है। दूसरे पक्ष की मध्यस्थता पर सहमति न होना उसी के बराबर है कि मध्यस्थता से समाधान नहीं निकला।

यह अंतिम उपाय है। वह तब उचित है जब टकराव जन के नियमों के अर्थ को छूता हो, जब ऐसा निर्णय चाहिए जो आगे के मामलों के लिए नमूना बने, या जब किसी पक्ष का बरताव स्वयं ही चार्टर के अनुच्छेद 22 या 22क में उपबंधित आधार बनाता हो।

विचार चार्टर की प्रक्रियाओं से होता है। किसी व्यक्ति को जन से निष्कासित करना सभा किसी भी परिस्थिति में नहीं कर सकती (घोषणा, अनुच्छेद 4); लागू होने वाले उपाय और उन्हें लागू करने का क्रम चार्टर के अनुच्छेद 22 और 22क में उपबंधित हैं।

किस पर मध्यस्थता नहीं होती

न सीधी बातचीत लागू होती है, न मध्यस्थता - व्यक्ति चरण 1 और 2 से गुज़रे बिना सीधे सभा (चरण 3) में जाता है या संबंधित अधिकारिता के उन निकायों में, जिन्हें जन प्रतिस्थापित नहीं करता:

  • जीवन और सुरक्षा को सीधी धमकियों पर;
  • घोषणा के स्पष्ट उल्लंघनों पर;
  • ऐसे कामों पर जो अपराध की श्रेणी में आते हैं - ऐसे मामले संबंधित अधिकारिता के निकायों के क्षेत्र में हैं, और जन उनकी जगह नहीं लेता।

खंड 02. संवाद

इस खंड में जो लिखा है, वह वह है जिसकी ओर जन बढ़ना चाहता है, जैसा दस्तावेज़ के आरंभ में कहा गया है। वह न कोई कर्तव्य बनाता है, न कोई परिणाम लाता है।

आधार

व्यक्ति के प्रति आदर। हर किसी को अपनी राय, आस्था, चुनाव और जीवन-ढंग का अधिकार है। Earthlings जन में भेदभाव, अपमान और उत्पीड़न की जगह नहीं है।

विचारों की आलोचना व्यक्ति के प्रति रवैये से अलग है। मुद्दे पर बहस व्यक्तिगत नहीं होती।

ईमानदारी। हर किसी को प्रश्न पूछने और साफ़ उत्तर पाने का अधिकार है। जन का उपयोग तोड़-मरोड़ के लिए या साझा हित की क़ीमत पर निजी लाभ के लिए करना अस्वीकार्य है।

कितना हिस्सा लेना है, यह हर किसी का अपना फ़ैसला। अनिवार्य सक्रियता जैसी कोई चीज़ नहीं है, और उसका न होना किसी बात का संकेत नहीं।

जो अभ्यास मदद करते हैं

सक्रिय श्रवण - केवल शब्द नहीं, उनके पीछे की बात भी सुनना। आरोपों की जगह पहले पुरुष में कही गई बात। अपनी ग़लती मान लेना, बिना अपनी स्थिति खोए। मिली प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। ठोस होना: एक काम पर की गई टिप्पणी व्यक्ति के बारे में राय से अधिक काम की है।

साझा जगह में तंज़ और चुभती बात छोड़ देने से बातचीत अधिक फलदायी होती है।

सीमा कहाँ से गुज़रती है

धमकियाँ, बदनामी और ज़बरदस्ती इस सीमा के पार हैं, किंतु वे जन से संबद्धता नहीं छीनतीं (घोषणा, अनुच्छेद 4)। अगर ऐसा बरताव चार्टर के अनुच्छेद 22 या 22क में उपबंधित आधार बनाता है, तो उसी अनुच्छेद के उपाय और उसी की प्रक्रिया लागू होती है।

कड़वाहट, व्यंग्य, असहमति और असुविधाजनक आलोचना कभी कोई परिणाम नहीं लातीं - न सीधे, न किसी दूसरे आधार की आड़ में (घोषणा, अनुच्छेद 4)।

खंड 03. भरोसा

Earthlings जन में भरोसा आह्वान पर नहीं, जाँच सकने पर टिका है: प्रक्रियाओं का खुलापन, सत्ता को चुपचाप जमा कर पाने की असंभवता, किसी भी विचलन का दिख जाना।

ऐसा भरोसा निगरानी की लागत घटाता है और निर्णयों को तेज़ करता है। वह तीन चीज़ों पर टिका है: व्यक्ति समझता है कि व्यवस्था कैसे काम करती है; काम और निर्णय पूर्वानुमेय हैं; ग़लतियाँ मान ली जाती हैं।

ग़लती भरोसे को नहीं तोड़ती, अगर उसके बाद उसे मान लिया जाए और सुधार लिया जाए।

खंड 04. कोशिकाओं में काम

कोशिका के भीतर बराबरी, भरोसा और नतीजे में साझा योगदान चलते हैं।

निर्णय मिलकर लिए जाते हैं, सभी प्रतिभागियों की राय को ध्यान में रखकर। भागीदारी के रूप अलग-अलग होते हैं - विचार से लेकर उसे पूरा करने तक - और उन सबका मोल है।

हर कोई अपनी भागीदारी का रूप बदल सकता है या कोशिका से बाहर जा सकता है, बिना कारण बताए और बिना किसी भर्त्सना के। पहले बनी सहमतियाँ वचन का प्रश्न बनी रहती हैं, किंतु बाहर जाने की शर्त नहीं हैं।

योगदान का मूल्यांकन खुली और पहले से ज्ञात कसौटियों से होता है। साझा नतीजे का मोल व्यक्तिगत श्रेष्ठता से ऊपर है।

खंड 05. मानसिक सुरक्षा

हर किसी को ऐसी जगह का अधिकार है जहाँ कही गई बात के लिए उसे न गिराया जाए और न उस पर हमला हो।

Earthlings जन ऐसे माहौल की ओर बढ़ना चाहता है जिसमें विचार रखने, ग़लती करने और अपना मन बदलने में डर न लगे। व्यक्ति की निजी परिस्थितियों की बात बाहर नहीं जाती।

खंड 06. बाहरी दुनिया से व्यवहार

सार्वजनिक रूप से बोलने वाला earthling अपने ही नाम से बोलता है, बशर्ते सभा ने उसे कुछ और न सौंपा हो।

जन प्रचार में, जानबूझकर झूठी बातें फैलाने में और वैमनस्य भड़काने में हिस्सा नहीं लेता।

नए क्षेत्रों में जन के बढ़ने पर जन स्थानीय संदर्भ और परंपराओं के साथ ऐसा आदर बरतता है, जिसके लिए खंड 02 के अनुसार अस्वीकार्य बरताव को स्वीकार करना अपेक्षित नहीं है। जुड़ना हमेशा स्वैच्छिक है; सांस्कृतिक भिन्नताएँ बाधा नहीं, समृद्धि मानी जाती हैं।

मानवता और ग्रह की चिंता, आने वाली पीढ़ियों के हितों का ध्यान और हिंसा का त्याग - ये आधार घोषणा में रखे गए हैं; यह दस्तावेज़ उनमें कुछ जोड़ता नहीं।

खंड 07. डाटा और संसाधन

प्रतिभागियों का वैयक्तिक डाटा व्यापारिक, राजनीतिक और तोड़-मरोड़ वाले प्रयोजनों के लिए काम में नहीं लिया जाता। प्रसंस्करण की सहमति सोच-समझकर और स्वेच्छा से दी जाती है, डाटा की मात्रा न्यूनतम रहती है। विस्तार से - गोपनीयता नीति में।

साझा साधनों का बँटवारा कोष दस्तावेज़ में नियत नियमों से, खुले तौर पर और जाँच सकने योग्य ढंग से होता है। यह दस्तावेज़ बँटवारे के अपने नियम नियत नहीं करता।

खंड 08. विकास

Earthlings जन वह सीखने का अवसर देता है जो साझा काम को आसान बनाता है: अहिंसक संवाद, चर्चा चलाना, आलोचनात्मक सोच, अपनी और दूसरों की दशाओं को पहचानना।

जन इन कौशलों की माँग नहीं करता, उनकी जाँच नहीं करता और उनसे किसी के अधिकार नहीं जोड़ता। कोई भी कुशलता संबद्धता, भागीदारी या मत की शर्त नहीं है (घोषणा, अनुच्छेद 8)।

ग़लतियाँ सीखने का हिस्सा मानी जाती हैं, दंड का बहाना नहीं (घोषणा, अनुच्छेद 4)।

खंड 09. स्वतंत्र परिषद की भूमिका

परिषद कठिन नैतिक प्रश्नों में समुदाय की मदद सार्वजनिक संस्तुतियों से करेगी और बाध्यकारी निर्णय नहीं लेगी।

उसके निष्कर्ष संस्तुति की प्रकृति के होंगे और पूरे प्रकाशित किए जाएँगे। सभा उनसे असहमत हो सकेगी, और इससे कोई परिणाम नहीं आएगा। परिषद न निर्णय रोकेगी, न उसके पास निषेधाधिकार होगा, न वह साधनों के प्रबंध में हिस्सा लेगी।

संरचना, बनने का क्रम, वापस बुलाने के आधार और काम की शर्तें चार्टर, अनुच्छेद 4 और Earthlings की स्वतंत्र परिषद दस्तावेज़ में नियत हैं।

खंड 10. इस दस्तावेज़ में परिवर्तन

यहाँ लिखा हुआ कोई हठधर्म नहीं है। कोई भी earthling परिवर्तन का प्रस्ताव दे सकता है, और वे चार्टर में नियत क्रम से खुली चर्चा के ज़रिए किए जाते हैं।

सीमाएँ अपरिवर्तनीय हैं: इस दस्तावेज़ में कुछ भी घोषणा के विरुद्ध नहीं जा सकता, उसकी दी हुई प्रत्याभूतियों को सँकरा नहीं कर सकता और चार्टर के अनुच्छेद 22 तथा 22क की बंद सूची से बाहर किसी उपाय के लिए आधार नहीं बना सकता।

इस दस्तावेज़ के किसी प्रावधान में अस्पष्टता होने पर उसका अर्थ व्यक्ति के पक्ष में लगाया जाता है।